Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गौराङ्ग रसेर नदी प्रेमेर तरङ्ग

गौराङ्ग रसेर नदी प्रेमेर तरङ्ग उथलिया या-इछे धारा कभु नहे भङ्ग
अर्थ

प्रभु गौरांग से अमृत की एक विशाल नदी बहती है। उस नदी की लहरें प्रेम की लहरें हैं। उमड़ती हुई वह नदी कभी बहना बन्द नहीं करती।

अभिराम सारङ्ग ताय तट दु-इ-खानि अच्युतानन्द ताहे प्रेमेर घुराँइ
अर्थ

अभिराम ठाकुर और सारंग ठाकुर उस नदी के दो किनारे हैं। अच्युतानन्द उसमें प्रेम का भँवर हैं।

स्रोत बहि याय ताहे श्री-अद्वैतचन्द्र दु/बारि काँडारि ताहे प्रभु नित्यानन्द
अर्थ

श्रीअद्वैतचन्द्र उस नदी की धारा हैं। प्रभु नित्यानन्द उस नदी में तैरने वाले गोताखोर भी हैं और उसके जल में चलने वाली नाव के कर्णधार भी।

प्रेम जलचर श्रीबासादि सहचर स्वरूप श्री रूप भेल प्रेमेर खकर
अर्थ

श्रीवास ठाकुर और उनके साथी प्रेम के उस जल में तैरने वाली मछलियाँ हैं। स्वरूप दामोदर और श्रीरूप गोस्वामी उस नदी पर चमकती प्रेम की धूप की किरणें हैं।

थाकुक डुबिबार काज परश ना पा-इया दुःखिया शेखर कान्दे फुकार करिया
अर्थ

हाय, उस नदी में तैर न पाने के कारण दुःखी शेखर दास किनारे पर ही रहकर ज़ोर-ज़ोर से रोता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
शेखर दास
पद
5