सुन्दर सुन्दर गौराङ्ग सुन्दर, सुन्दर सुन्दर रूप
सुन्दर, अति सुन्दर हैं प्रभु गौरांगसुन्दर। सुन्दर, अति सुन्दर है उनका रूप। वे सुन्दर प्रेम-राज्य के सुन्दर राजा हैं।
सुन्दर है उनका मुख। सुन्दर हैं उनकी मुस्कान और हँसी। सुन्दर, अति सुन्दर है उनकी शोभा। सुन्दर हैं उनके नेत्र। सुन्दर हैं उनकी चितवन। सुन्दर हैं उनके हृदय की दिव्य लालसाएँ।
सुन्दर है उनकी नासिका। सुन्दर है उनका तिलक। वे देखने में अत्यन्त सुन्दर हैं। सुन्दर हैं उनके कान। सुन्दर हैं उनके केश। सुन्दर है उनकी दीप्ति।
सुन्दर है उनका मस्तक। सुन्दर हैं उनके केश। वे सुन्दर बादल के समान हैं। सुन्दर है फूलों की वह माला जिसे वे अपने सुन्दर गले पर सुन्दरता से इधर से उधर झुलाते हैं।
सुन्दर हैं प्रभु चैतन्यचन्द्र, जो सुन्दर नदिया नगर में लीला करते हैं। जन्म से अन्धा शेखर राय उनकी सुन्दर लीलाओं की शोभा को नहीं समझता।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- शेखर दास
- पद
- 5