Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोराचन्देर अज्ञ पेये गृह बासि गण

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गोराचन्देर अज्ञ पेये गृह-बासि-गण मृत सुत अङ्गनेते आन तत-खण
अर्थ

चैतन्य महाप्रभु की आज्ञा पाकर घर के सब लोग तुरन्त मृत पुत्र को आँगन में ले आए।

कलि-मल-हरि गोरा जिज्ञासे तखन श्रीबासे छाडिया शिशु जाओ कि कारण
अर्थ

तब कलियुग के पापों को हरने वाले चैतन्य महाप्रभु ने पूछा, "हे बालक, तुम श्रीवास को छोड़कर क्यों जा रहे हो?"

मृत-शिशु-मुखे जीब कोरे निबेदन लोक-शिख लागि प्रभु तब आचरण
अर्थ

मृत बालक के मुख से वह जीव बोला, "प्रभु, आप संसार को शिक्षा देने के लिए ही ऐसा आचरण करते हैं।

तुमि तो' परम-तत्त्व अनन्त अद्वय पर शक्ति तोमार अभिन्न तत्त्व होय
अर्थ

"आप ही अनन्त और अद्वैत परम तत्त्व हैं। आपकी परा शक्ति आपसे भिन्न नहीं है।

सेइ परा शक्ति त्रिधा होइया प्रोकाश तब इच्छा-मत कोरय तोमार बिलास
अर्थ

"वह परा शक्ति तीन रूपों में प्रकट होती है। आपकी इच्छा से ही वह आपकी लीलाओं को सम्पन्न करती है।

चिच्-छक्ति-स्वरूपे नित्य-लीला प्रोकाशिया तोमारे आनन्द देन ह्लादिनी होइया
अर्थ

"आपकी चित्-शक्ति अपने स्वरूप में आपकी नित्य-लीलाओं को प्रकट करती है। ह्लादिनी शक्ति बनकर वही शक्ति आपको आनन्द प्रदान करती है।"

जीब-शक्ति हन तब चित्-किरण-चये तटस्थ-स्वभाबे जीब-गणे प्रकटये
अर्थ

"जीव-शक्ति बनकर आपकी वही चित्-शक्ति असंख्य जीवों को प्रकट करती है, जो आपकी चित्-किरणों के कण हैं और जड़-चेतन की सीमा पर तटस्थ स्वभाव में स्थित हैं।

माया-शक्ति हो'ये कोरे प्रपञ्च सृजन बहिर्मुख जीबे ताहे कोरोय बन्धन
अर्थ

"माया-शक्ति बनकर आपकी वही शक्ति इस भौतिक जगत की रचना करती है, और उसमें वह उन जीवों को बाँध लेती है जिन्होंने आपसे मुख मोड़ लिया है।"

भकतिबिनोद बोले अपराध-फले बहिर्मुख हो'ये आछि प्रपञ्च-कबले
अर्थ

भक्तिविनोद कहते हैं: अपने अपराधों के फलस्वरूप मैंने कृष्ण से मुख मोड़ लिया, और इसी कारण मैं इस माया-जगत का ग्रास बन गया।