Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

प्रभुर बचन तखन शुनिया

प्रभुर बचन तखन शुनिया श्रीबास लोटाञा भूमि बोले शुनो नाथ तब रस-भङ्ग सहिते ना पारि आमि
अर्थ

प्रभु के वचन सुनकर श्रीवास भूमि पर लोट गए और बोले, "हे नाथ! सुनिए, मैं आपके रस-भंग को सहन नहीं कर सकता।"

एकटि तनय मरियाछे नाथ ताहे मोर किब दुःख जदि सब मरे तोमारे हेरिया तबु तो' पाइबो सुख
अर्थ

"हे नाथ! मेरा एक पुत्र मर गया, इसमें मुझे क्या दुःख है? यदि सब पुत्र मर जाएँ, तो भी आपके दर्शन से मुझे सुख ही मिलेगा।

तब नृत्य-भङ्ग होइले आमार मरण होइते हरि ताइ कु-सम्बाद ना दिलो तोमारे बिपद आशङ्का कोरि'
अर्थ

हे हरि! आपके नृत्य में विघ्न पड़ना मेरे लिए मृत्यु से भी बढ़कर है। इसी अनिष्ट के भय से मैंने आपको यह दुःखद समाचार नहीं दिया।

एबे आज्ञा देहो मृत सुत लो'ये सत्कार कोरुन सबे एतेक शुनिया गोरा द्विज-मणि कान्दिते लगिलो तबे
अर्थ

"अब आज्ञा दें, हम मृत पुत्र को लेकर उसका अन्तिम संस्कार करें।" यह सुनकर ब्राह्मणों के शिरोमणि चैतन्य महाप्रभु रो पड़े।

केमोने ए सब छाडिया जाइबो परण बिकल होय से कथा शुनिया भकतिबिनोद मनेते पाइलो भोय
अर्थ

"इन सबको छोड़कर मैं कैसे जा सकता हूँ? ऐसा हुआ तो मेरे प्राण व्याकुल हो उठेंगे।" यह बात सुनकर भक्तिविनोद के मन में भय समा गया।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
5