Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पूर्ण चिद् आनन्द तुमि तोमार चित् कण आमि

पूर्ण-चिद्-आनन्द तुमि तोमार चित्-कण आमि स्वभाबतः आमि तुया दास परम स्वतन्त्र तुमि तुया परतन्त्र आमि तुया पद छाडि' सर्ब-नाश
अर्थ

"आप पूर्ण चिदानन्द हैं, मैं आपका चित्-कण हूँ। स्वभाव से ही मैं आपका दास हूँ। आप परम स्वतन्त्र हैं, मैं आपके अधीन हूँ। आपके चरणों को छोड़कर मैंने अपना सब कुछ नष्ट कर लिया।

स्वतन्त्र हो'ये जखन माया प्रति कोइनु मन स्व-स्वभाब छाडिलो आमाय प्रपञ्चे मायार बन्धे पदिनु कर्मेर धन्दे कर्म-चक्रे आमारे फेल्य
अर्थ

"जब मैं आपसे स्वतन्त्र होने लगा, मेरा मन माया की ओर आकर्षित हो गया। अपने स्वभाव को त्यागकर मैं इस पंचभौतिक जगत में माया के बन्धन में पड़ गया। कर्म के भ्रम में उलझकर मुझे कर्म के चक्र पर घूमना पड़ा।

माया तब इच्छा-मते बान्धे मोरे ए जगते अदृष्ट निर्बन्ध लौह-कोरे सेइ तो' निर्बन्ध मोरे अने श्रीबासेर घोरे पुत्र-रूपे मलिनी-जठोरे
अर्थ

"आपकी इच्छा से माया ने मुझे इस संसार के बन्धन में बाँध दिया। भाग्य की उन अदृष्ट लौह-शृंखलाओं से बँधा हुआ मैं श्रीवास के घर लाया गया और मालिनी की कोख में पुत्र के रूप में रख दिया गया।

से निर्बन्ध पुनराय मोरे एबे लो'ये जाय आमि तो' थाकिते नारि आर तब इच्छा सु-प्रबल मोर इच्छा सु-दुर्बल आमि जीब अकिञ्चन छार
अर्थ

"वही भाग्य अब मुझे फिर से यहाँ से ले जा रहा है, अब मुझमें रुकने की शक्ति नहीं है। आपकी इच्छा अत्यन्त बलवान है, मेरी इच्छा अत्यन्त दुर्बल है। मैं तो एक साधारण जीव हूँ, मेरे पास कुछ भी नहीं, मैं राख का ढेर हूँ।

जथाय पाठाओ तुमि अबश्य जाइबो आमि कर केब पुत्र पति पिता जडेर सम्बन्ध सब ताहा नाहि सत्य-लब तुमि जीबेर नित्य पालयिता
अर्थ

"आप जहाँ भेजेंगे, मुझे वहीं जाना होगा, किसी का पुत्र, पति या पिता बनना होगा। ये सब सांसारिक सम्बन्ध हैं, इनमें नित्य सत्य का कणमात्र भी नहीं है। आप ही जीव के नित्य रक्षक हैं।

सञ्जोगे बिजोगे जिनि सुख-दुःख मने गणि तब पदे छाडेन आश्रोय मायार गर्दभ हो'ये माजेन सोंसार लो'ये भक्तिबिनोदेर सेइ भोय
अर्थ

"हे प्रभु! जो व्यक्ति अपने बन्धु-बान्धवों के मिलने और बिछुड़ने को ही सुख-दुःख का कारण मानकर आपके चरणों की शरण छोड़ देता है, वह सचमुच माया का गधा है, वह संसार-सागर में डूब ही रहा है।" इसी बात का भय भक्तिविनोद के मन में समा गया।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
6