Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

हरे हरये नमः कृष्ण जादबाय नमः

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(हरे) हरये नमः कृष्ण जादबाय नमः जादबाय माधबाय केशबाय नमः गोपाल गोबिन्द राम श्री-मधुसूदन राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
अर्थ

(हरि!) भगवान हरि को प्रणाम! यदुवंशी भगवान कृष्ण को प्रणाम! भगवान कृष्ण को प्रणाम, जो लक्ष्मी के पति हैं, ब्रह्मा और शिव के स्वामी हैं, और यदुवंश में अवतरित हुए हैं! हे गोपाल! हे गोविन्द! हे राम! हे श्री मधुसूदन! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार)

गोबिन्द गोबिन्द गोबिन्द बोलो राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्) गुरु-कृपा जले नाशि' बिषय-अनल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
अर्थ

बोलो, "गोविन्द! गोविन्द! गोविन्द!" बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार) गुरु की कृपा के जल से विषय की जलती हुई आग को बुझा दो! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार)

कृष्णेते अर्पिया देह-गेहादि सकल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्) अनन्य-भाबेते चित्त कोरिया सरल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
अर्थ

अपना शरीर, घर और सब कुछ भगवान कृष्ण को समर्पित करो! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार) अपने हृदय को सरल बनाकर अनन्य भाव से उनसे प्रेम करो! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार)

रूपानुग बैष्णबेर पिया पद-जल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्) दश अपराध त्यजि' भुक्ति-मुक्ति-फल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
अर्थ

श्रील रूप गोस्वामी के अनुयायी शुद्ध वैष्णव के चरणों को धोया हुआ जल पियो! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार) दस प्रकार के अपराधों को छोड़ो! भौतिक इन्द्रिय-सुख और निर्विशेष मुक्ति के फल को छोड़ो! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार)

सखीर चरण-रेणु कोरिया सम्बोल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्) स्वरूपेते ब्रज-बासे होइया शीतल राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
अर्थ

गोपियों के चरणों की धूल को अपना धन और खज़ाना बनाओ। बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार) विषय की जलती हुई आग को बुझा दो। शीतल और तृप्त होकर अपने स्वरूप में प्रकट होओ, और सदा व्रज में निवास करो! बोलो, "राधा-गोविन्द!" (4 बार)