Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

हरि हरि ! कबे हब वृन्दावन वासी

हरि हरि ! कबे हब वृन्दावन-वासी निरखिब नयने जुगल-रूप-राशि
अर्थ

हे हरि! हे हरि! कब मैं वृन्दावन का निवासी बनूँगा, और अपनी आँखों से दिव्य युगल की अपार सुंदरता का दर्शन करूँगा?

त्यजिया शयन-सुख विचित्र पालञ्क कबे ब्रजेर धूलाय दूसर हबे अन्ग
अर्थ

सुंदर सेज पर सोने के सुख को त्यागकर, कब मेरा शरीर व्रज की धूल से धूसरित होगा?

षड-रस-भोजन दूरे परिहरि कबे ब्रजे मागिया खाइब माधुकरी
अर्थ

सांसारिक स्वादिष्ट भोजन को दूर त्यागकर, कब मैं व्रज में भिक्षा माँगकर खाऊँगा?

परिक्रमा करिया बेडाब वने वने विश्राम करिब जाइ जमुना-पुलिने
अर्थ

वन-वन घूमते हुए कब मैं व्रज की परिक्रमा करूँगा? और थककर कब यमुना के तट पर विश्राम करूँगा?

ताप दूर करिब शीतल वंशीवटे कबे कुञ्जे बैठब हाम वैष्णव-निकटे
अर्थ

शीतल वंशीवट में कब मैं दिन की गर्मी से राहत पाऊँगा? कब कुंज में बैठकर वैष्णवों के समीप रहूँगा?

नरोत्तम दास कहे करी परिहार कबे वा एमन दशा हैबे आमार
अर्थ

नरोत्तम दास सब कुछ त्यागकर कहते हैं: 'मुझे ऐसी दशा कब प्राप्त होगी?'

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
प्रार्थना
पद
6