Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जगतेर बस्तु जत बद्ध सब स्वभाबत

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हरि हे जगतेर बस्तु जत बद्ध सब स्वभाबत देश काल बस्तु सिमाश्रोय तुमि प्रभु सर्बेश्वर नह सीमा-बिधि-पर बिधि सब कम्पे तब भोय
अर्थ

हे कृष्ण! यह संसार समय और स्थान की सीमाओं से बँधा एक बंदीगृह है। हे प्रभु, आप सबके स्वामी हैं, इस संसार के नियम और सीमाएँ आपको स्पर्श नहीं करतीं। इस जगत के सभी नियम आपके भय से कांपते हैं।

सम बा अधिक तब स्वभाबतः असम्भाब बिधि लङ्घि' तब अबस्थान स्वतन्त्र स्वभाब धरो आपने गोपन कोरो माया-बले कोरि' अधिष्ठान
अर्थ

स्वभाव से आपके समान या आपसे बड़ा कोई नहीं हो सकता। आप सभी नियमों से परे हैं। आप पूर्णतः स्वतन्त्र हैं। अपनी माया-शक्ति के बल से आप स्वयं को छिपाए रखते हैं।

तथापि अनन्य-भक्त तोमारे देखिते शक्त सदा देखे स्वरूप तोमार ए भक्तिबिनोद दिन अनन्य भजन हीन भक्त-पद-रेणु-मात्र सार
अर्थ

फिर भी आपके शुद्ध भक्त आपको देखने में सक्षम हैं, वे सदा आपके स्वरूप का दर्शन करते हैं। दीन भक्तिविनोद कभी आपकी अनन्य भक्ति नहीं कर पाया, उसके लिए तो आपके भक्तों के चरणों की धूल ही सबसे बड़ा धन है।