Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पर तत्त्व बिचखण ब्यास आदि मुनि गण

हरि हे पर-तत्त्व बिचखण ब्यास आदि मुनि-गण शास्त्र बिचारिया बार बार प्रभु तब नित्य-रूप गुण-शील अनुरूप तोमार चरित्र सुधा-सार
अर्थ

हे हरि, हे परम सत्य! परम तत्त्व को जानने वाले व्यास आदि मुनि बार-बार शास्त्रों पर विचार करके आपके नित्य रूप, गुण और स्वभाव का गान करते हैं। हे प्रभु, आपकी लीलाएँ अमृत का सार हैं।

शुद्ध-सत्त्व-मोयी लीला मुख्य-शास्त्रे प्रोकाशिल जीबेर कुशल सु-बिधान रजस्-तमो-गुण-अन्ध असुर-प्रकृति-मन्द जने ताहा बुझित ना जाने
अर्थ

आपकी शुद्ध सत्त्वमयी लीलाओं को प्रमुख शास्त्रों में जीवों के कल्याण के लिए प्रकट किया गया है। परन्तु रजोगुण और तमोगुण से अंधे हुए आसुरी स्वभाव के मूढ़ लोग उन लीलाओं को समझ नहीं पाते।

नाहि माने नित्य-रूप भजिया मण्डूक-कूप रहे ताहे उदासीन प्राय ए भक्तिबिनोद गाय कि दुर्दैब हय हाय हरि-दास नाहि हरि पाय
अर्थ

इस संसार के लोग आपके नित्य स्वरूप को नहीं मानते और आपकी भक्ति नहीं करते। वे मेढक के कुएँ में पड़े रहकर आपके प्रति उदासीन बने रहते हैं। भक्तिविनोद गाते हैं, हाय, यह कैसा दुर्भाग्य है कि जो जीव स्वभाव से ही हरि के दास हैं, वे हरि तक पहुँच ही नहीं पाते।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
3