Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जोग जाग सब छार श्रद्धा सकलेर सार

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जोग जाग सब छार श्रद्धा सकलेर सार सेइ श्रद्धा हृदोये जाहार उदियाछे एक बिन्धु क्रमे भक्ति-रस-सिन्धु लाभे तार होय अधिकार
अर्थ

योग और यज्ञ सब राख के ढेर हैं, श्रद्धा ही सबका सार है। जिसके हृदय में यह श्रद्धा उदय होती है, उसे पहले भक्ति-रस के सागर की एक बूँद मिलती है, फिर क्रमशः वह उस पूरे भक्ति-रस-सागर में प्रवेश का अधिकारी बन जाता है।

ज्ञान कर्म देब देबि बहु जतनेते सेबि' प्राप्त-फल होइलो तुच्छ ज्ञान साधु-जन-सङ्गाबेशे श्री-कृष्ण-कथार शेषे बिश्वासो तो' होय बलबान्
अर्थ

कर्म और ज्ञान से बड़े प्रयास करके देवी-देवताओं की सेवा करने पर भी तुच्छ फल और तुच्छ निर्विशेष विचार ही हाथ लगते हैं। परन्तु साधुजनों की संगति में रहकर कृष्ण-कथा सुनने से भगवान् में दृढ़ विश्वास जागृत होता है।

सेइ तो' बिश्वासे भाइ श्रद्धा बोलि' सदा गाइ भक्ति-लता बीज बोलि तारे कर्मी ज्ञानी जने जारे श्रद्धा बोले बारे बारे सेइ बृत्ति श्रद्धा होइते नारे
अर्थ

हे भाइयों! यही सच्ची श्रद्धा है, इसी श्रद्धा का मैं सदा गान करता हूँ। यह श्रद्धा ही भक्ति-लता का बीज है। कर्मी और ज्ञानी बार-बार जिसे श्रद्धा कहते हैं, वह भाव सच्ची श्रद्धा नहीं हो सकता।

नामेर बिबद मात्र शुनिया तो' ज्वले गात्र लौहे जदि बोलोहो कञ्चन तबु लौह लौह रोय कञ्चन तो' कभु नोय मणि स्पर्श नाहे जत-खण
अर्थ

जब मैं उन्हें पवित्र नाम की महिमा पर विवाद करते सुनता हूँ, तो मेरे अंग जलने लगते हैं। यदि तुम लोहे को सोना कह दो, तो भी लोहा लोहा ही रहेगा। जब तक उसे चिन्तामणि का स्पर्श न मिले, वह कभी सोना नहीं बन सकता।

कृष्ण-भक्ति चिन्तामणि तँर स्पर्शे लौह-खनि कार्म-ज्ञान-गत श्रद्धा-भाब हय जय हेम-भर छाडिया तो' कु-बिकार से केबल मणिर प्रभाब
अर्थ

कृष्ण-भक्ति ही वह चिन्तामणि है। उसके स्पर्श से कर्म और ज्ञान में लगी हुई श्रद्धा का लोहा, भक्ति में श्रद्धा के सोने में बदल जाता है। यह शक्ति केवल भक्ति के इस चिन्तामणि में ही है।