Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

केनो मन कामेरे नचाओ प्रेम प्राय

केनो मन कामेरे नचाओ प्रेम-प्राय चर्म-मांस-मोय काम जोड-सुख अबिराम जोड-बिषयेते सदा धाय
अर्थ

हे मन, तू काम को प्रेम जैसा बनाकर क्यों नचाता है? चमड़े और मांस से बना यह काम निरन्तर जड़ सुख ही चाहता है, और सदा जड़ विषयों के पीछे दौड़ता है।

जीबेर स्वरूप धर्म चित्-स्वरूपे प्रेम-मर्म ताहार बिषय-मात्र हरि काम-आबरणे हाय प्रेम एबे सुप्त-प्राय प्रेम जागाओ काम दूर कोरि'
अर्थ

जीव का स्वरूप ही आध्यात्मिक है, और उस चिद्-स्वरूप में प्रेम का सार छिपा है, जिसका एकमात्र विषय भगवान हरि हैं। हाय, काम के आवरण से ढँककर वह प्रेम अभी सोया हुआ-सा है। काम को दूर भगाकर उस प्रेम को जगा।

श्रद्धा होइते साधु-सङ्गे भजनेर क्रिया-रङ्गे निष्ठा-रुचि-आसक्ति-उदोय आसक्ति होइते भाब ताहे प्रेम प्रादुर्भाब एइ क्रमे प्रेम उपजोय
अर्थ

श्रद्धा से साधु-संग होता है, और भजन की क्रियाओं में आनन्द से लगने पर निष्ठा, रुचि और आसक्ति का उदय होता है। आसक्ति से भाव होता है, और उस भाव में प्रेम प्रकट होता है। इसी क्रम से प्रेम उत्पन्न होता है।

इहाते जतन जा'र सेइ पाय प्रेम-सार क्रम-त्यागे प्रेम नाहि जागे ए-क्रम-साधने भोय केनो कोरो' दुराशोय कामे प्रेम कभु नाहि लागे
अर्थ

जो इस मार्ग में प्रयास करता है, वही सच्चे प्रेम को प्राप्त करता है। इन चरणों को छोड़ देने से प्रेम कभी नहीं जागता। हे दुष्ट मन, तू इस साधन-क्रम से क्यों डरता है? काम से कभी प्रेम उत्पन्न नहीं हो सकता।

नाटकाभिनोय प्राय स-कपट प्रेम भाय ताहे मात्र इन्द्रिय-सन्तोष इन्द्रिय-तोषण छार सदा कोरो' परिहार छारो भाइ अपराधा-दोष
अर्थ

किसी अभिनेता के स्वांग की भाँति, तेरा यह छद्म 'प्रेम' केवल दिखावा है, इसमें केवल इन्द्रिय-तृप्ति ही है। इन्द्रिय-भोग व्यर्थ राख के समान है, इसे सदा त्याग दे। हे भाई, इन अपराधों को भी त्याग दे।

इस भजन के बारे में

पद
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