कि रूपे पाइब सेवा
मुझ जैसा दुराचारी सेवा किस प्रकार पाए? श्रीगुरु और वैष्णवों के प्रति मुझमें कोई अनुराग ही नहीं है।
मेरा मन सदा माया में पूर्णतः डूबा रहता है, वैष्णवों के प्रति मुझमें रत्ती भर भी भक्ति नहीं जगी।
विषयों में लगे रहकर मैं दिन-रात अंधा हो गया हूँ। यह मायारूपी पिशाचिनी मेरे गले में फांसी का फंदा डालने को घूम रही है।
इस पर विजय पा भी लूँ, तो भी मुक्ति नहीं मिल सकती, साधुओं की कृपा के बिना और कोई उपाय नहीं है।
हे प्रभु, हे पापियों को पवित्र करने वाले, हे पतितों के उद्धारक, इस बार नरोत्तम का उद्धार करें।
इस भजन के बारे में
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- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।