कृष्ण भक्ति बिना कभु नाहि फलोदोय
कृष्ण-भक्ति के बिना जीवन का कोई फल नहीं मिलता। पुण्य और पाप, दोनों केवल मिथ्या हैं। ये आत्मा पर चढ़ाई गई कृत्रिम उपाधियाँ मात्र हैं।
जब योग, यज्ञ, तप, ध्यान, संन्यास आदि केवल निर्विशेष ब्रह्म-ज्ञान पाने के लिए किए जाते हैं, तो ये आत्मा को बाँधने वाली अनेक बेड़ियाँ ही बन जाते हैं।
भक्तिविनोद के वचन ग्रहण करो। इन सब विधियों को छोड़ दो। अपने हृदय में उस शुद्ध कृष्ण-प्रेम की शरण लो, जो इस संसार की कृत्रिम उपाधियों से परे है।