Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कृष्णेर जतेक खेला तार मध्ये नर लीला

Read in English

दिखाएँ
टेक्स्ट
कृष्णेर जतेक खेला तार मध्ये नर-लीला सर्बोत्तम रसेर आलोय ए रस गोलोके नाइ तबे बोलो कोथा पाइ ब्रज-धाम ताहार निलोय
अर्थ

कृष्ण की समस्त लीलाओं में उनकी नर-लीला ही सर्वश्रेष्ठ है, और वही रस का आश्रय-स्थान है। यह रस गोलोक में भी नहीं मिलता, तो फिर मैं इसे कहाँ पाऊँ? कृपया मुझे बताओ। व्रज-धाम ही वह स्थान है जहाँ यह रस निवास करता है।

नित्य-लीला द्वि-प्रकार सान्तर ओ निरन्तर जाहे माझे रसिकेर मन जन्म-बृद्धि दैत्य-नाश मथुरा द्वारका-बास नित्य-लीला सान्तरे गणन
अर्थ

कृष्ण की नित्य-लीला दो प्रकार की है: सान्तर और निरन्तर। रसिक भक्त इन्हीं लीलाओं का ध्यान करते हैं। कृष्ण का जन्म, बड़ा होना, दैत्यों का नाश और मथुरा-द्वारका में निवास, ये सब सान्तर नित्य-लीला में गिने जाते हैं।

दिबा रात्र अष्ट-भागे ब्रज-जन अनुरागे कोरे कृष्ण-लीला निरन्तर ताहार बिराम नाइ सेइ नित्य-लीला भाइ ब्रह्म-रुद्र-शेषअगोचर
अर्थ

श्रीकृष्ण दिन-रात के आठों प्रहर व्रजवासियों के साथ अत्यन्त प्रेमपूर्वक अपनी निरन्तर लीला करते रहते हैं। यह लीला कभी नहीं रुकती। हे भाइयों, ब्रह्मा, शिव और शेष भी इस नित्य-लीला को नहीं देख सकते।

ज्ञान जोग कोरो जत होय ताहा दूर-गत शुद्ध राग नयने केबल सेइ लीला राखित होय परानन्द बितरोय होय भक्त-जीबन सम्बल
अर्थ

ज्ञान और योग को दूर फेंक दो। शुद्ध प्रेम की दृष्टि से ही इन आनन्दमय लीलाओं को देखो, जो भक्तों के जीवन का आधार हैं और उनके हृदय का सबसे बड़ा सम्बल हैं।