लोकनाथ प्रभु ! तुमि दया कर मोरे
हे लोकनाथ प्रभु! मुझ पर कृपा करो, जिससे राधा-कृष्ण के चरण मेरे चित्त में सदा जागृत रहें।
तुम जब गोपी-सखी के रूप में रहते हो, तब तुम्हारा साथ पाने की यह इच्छा मेरे मन में सदा उठती रहती है।
गोपियों में जो सबसे श्रेष्ठ हैं, उन श्रीमती राधारानी के चरणों में, कब तुम मुझे सेवा हेतु समर्पित करोगे?
तब मेरी यह अभिलाषा पूर्ण होगी, और मैं आनंदपूर्वक दिव्य युगल के चरणों की सेवा कर सकूँगा।
हे श्री रूप-मंजरी सखी! अपनी कृपा-दृष्टि मुझ पर डालो, और इस व्यथित नरोत्तम दास को सेवा के अमृत से सींच दो।
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- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।