Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
मन, जोगी हो'ते तोमार बासना जोग-शास्त्र अध्ययन नियम-यम-साधन प्राणायम आसन-रचना
अर्थ

हे मन, अब तू योगी बनना चाहता है। तू योगशास्त्र का अध्ययन करता है, और यम-नियम, प्राणायाम तथा आसन का अभ्यास करने की प्रतिज्ञा करता है।

प्रत्याहार ध्यान धृति समाधिते हो'ले ब्रती फल किबा होइबे बोलो ना देहो मन शुष्क कोरि' रोहिबे कुम्भक धोरि' ब्रह्मात्मता कोरिबे भाबना
अर्थ

फिर तू प्रत्याहार, ध्यान, धृति और समाधि का व्रत लेता है। पर बता तो, इससे कौन-सा फल मिलेगा? शरीर और मन को सुखाकर, कुम्भक में श्वास रोककर, तू केवल यही भावना करता रहेगा कि तू ब्रह्म से एक है।

अष्टादश सिद्धि पा'बे परमार्थ भुले जा'बे ऐश्वर्यादि कोरिबे कामना स्थूल जोड परिहरि' सुक्ष्मेते प्रबेश कोरि' पुनराय भुगिबे जतना
अर्थ

अठारह सिद्धियों को प्राप्त करके तू जीवन के वास्तविक लक्ष्य को भूल जाएगा। तू और अधिक ऐश्वर्य तथा सिद्धियों की कामना करने लगेगा। स्थूल जगत् को छोड़कर सूक्ष्म जगत् में प्रवेश करने पर भी तुझे फिर कष्ट ही भोगना पड़ेगा।

आत्मा नित्य शुद्ध धन हरि-दास अकिञ्चन जोगे ता'र कि फल घटना कोरो' भक्ति-जोगाश्रोय ना थाकिबे कोन भोय सहज अमृत सम्भाबना
अर्थ

यह आत्मा नित्य और शुद्ध धनरूप है, वह भगवान हरि का ही सेवक है, उसे और किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं। ऐसी आत्मा को योग से क्या लाभ होगा? इसलिए भक्ति-योग की शरण ग्रहण कर। तब तुझे कोई भय नहीं रहेगा और तू सहज ही अमृत का स्वाद पाएगा।

बिनोदेर ए मिनति छारि' अन्य-जोग-गति कोरो' राधा-कृष्ण-अराधान
अर्थ

यह भक्तिविनोद की विनती है: अन्य सभी योग-मार्गों को त्यागकर, राधा-कृष्ण की आराधना कर।