Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
दिखाएँ
टेक्स्ट
मन, तुमि पडिले कि छार? नबद्वीप पाठ कोरि' न्याय-रत्न नाम धोरि' भेकेर कच् कचि कोइले सार
अर्थ

हे मन, तूने यह कैसी राख पढ़ी? नवद्वीप में पढ़कर तूने 'न्यायरत्न' की उपाधि तो पा ली, पर सच यह है कि तेरी सारी बातें मेंढक की टर्र-टर्र जैसी ही हैं।

द्रब्यादि पदार्थ-ज्ञन छलादि निग्रह-स्थान समबाय कोरिले बिचार तर्केर चरम फल भोयङ्कर हलाहल नाहि बिचारिले दुर्णिबार
अर्थ

तूने द्रव्य, पदार्थ, छल, निग्रहस्थान और समवाय जैसे तर्कशास्त्र के विषयों पर विचार किया। पर तूने यह नहीं सोचा कि तर्क का अंतिम फल भयानक हलाहल विष है, जिससे बचना कठिन है।

हृदोय कथिण हो'लो भक्ति-बीज ना बारिलो किसे हो'बे भब-सिन्धु-पार? अनुमिले जे इश्वर से कुलाल-चक्राधार साधन केमोने हो'बे तार?
अर्थ

हे मन, तू अत्यन्त कठोर हो गया है। तुझमें भक्ति का बीज कैसे अंकुरित होगा? तू मुझे भव-सागर के उस पार कैसे ले जाएगा? तू तो परमेश्वर को मात्र एक कुम्हार के समान मानता है, जो चाक पर घड़ा बनाता है। ऐसी सोच से मेरा साधन-जीवन किस प्रकार सिद्ध होगा?

सहज-समाधि त्यजि' अनुमिति मान भजि तर्क-निष्ठा हृदोय तोमार से हृदोये कृष्ण-धन नाहि पन सुखासन अधो धिक् सेइ तर्क छार
अर्थ

स्वाभाविक ध्यान को त्यागकर तू अनुमान के अभिमान की पूजा करता है। हे मन, तेरे हृदय में केवल तर्क पर ही श्रद्धा है। इसीलिए श्रीकृष्ण रूपी महान् धन इस हृदय में सुख से नहीं बैठ पाता। धिक्कार है इस तर्क को, यह तो राख का ढेर मात्र है!

अन्याय न्यायेर मत दूर कोरो अबिरत भजो कृष्णचन्द्र सारात्-सार
अर्थ

इस मिथ्या तर्क को सदा के लिए दूर फेंक दे, और सर्वश्रेष्ठ श्रीकृष्णचन्द्र की भक्ति कर।