Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मृत शिशु लो'ये तबे भकत बत्सल

मृत शिशु लो'ये तबे भकत-बत्सल भकत-सङ्गेते गाय श्री-नाम-मङ्गल
अर्थ

तब भक्तवत्सल चैतन्य महाप्रभु ने स्वयं मृत बालक को उठाया और भक्तों के साथ मिलकर पवित्र नाम का मंगल कीर्तन करने लगे।

गाइते गाइते गेला जाह्नबीर तीरे बलके सत्कार कोइलो जाह्नबीर नीरे
अर्थ

गाते-गाते वे सब गंगा के तट पर पहुँचे। गंगा के जल में बालक का अन्तिम संस्कार किया गया।

जाह्नबी बोलेन मम सौभाग्य अपार सफल होइलो ब्रत छिलो जे आमार
अर्थ

गंगा देवी बोलीं, "मेरा सौभाग्य अपार है। मैंने जो व्रत रखे थे, वे आज सफल हो गए।"

मृत शिशु देन गोरा जाह्नबीर जले उठलि जाह्नबी देबी शिशु लोय कोले
अर्थ

चैतन्य महाप्रभु ने मृत बालक को गंगा के जल में रख दिया। बालक को गोद में लेकर गंगा देवी जल से ऊपर उठ आईं।

उठलिया स्पर्श गोरा-चरण-कमल शिशु कोले प्रेमे देबी होय टलमल
अर्थ

जल से उठकर देवी ने चैतन्य महाप्रभु के चरण-कमलों को स्पर्श किया। बालक को गोद में लिए हुए वे प्रेम से काँप उठीं।

जाह्नबीर भाब देखि' जत भक्त-गण श्री-नाम-मङ्गल-ध्वनि कोरे अनुखण
अर्थ

गंगा देवी का यह प्रेमभाव देखकर भक्तगण क्षण-क्षण पवित्र नाम की मंगल-ध्वनि करने लगे।

स्वर्गे होइते देबे कोरे पुष्प-बरिषण बिमान सङ्कुल तबे छैलो गगन
अर्थ

स्वर्गलोक से आकर देवताओं ने फूलों की वर्षा की। आकाश उनके दिव्य विमानों से भर गया।

एइ रूपे नाना-भाबे होइया मगन सत्कार कोरिया स्नान कोइलो सर्ब-जन
अर्थ

सब लोग विविध प्रकार के प्रेमभाव में डूब गए। अन्तिम संस्कार पूर्ण होने के बाद सब ने स्नान किया।

परम आनन्दे सबे गेलो निज घरे भकतिबिनोद माजे गोरा-भाब-भरे
अर्थ

सब लोग परम आनन्द के साथ अपने-अपने घर लौट गए। भक्तिविनोद अब चैतन्य महाप्रभु के प्रेम-भाव में डूबे हुए हैं।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
9