Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्रीबासेर प्रति चैतन्य प्रसाद

श्रीबासेर प्रति चैतन्य-प्रसाद देखिया सकल जन जय श्री-चैतन्य जय नित्यानन्द बोलि' नाचे घन घन
अर्थ

श्रीवास पर चैतन्य महाप्रभु की कृपा देखकर सब लोग बार-बार नाचने लगे और पुकार उठे, "जय श्री चैतन्य! जय नित्यानन्द!"

श्रीबास-मन्दिरे कि भाब उठिलो ताहा कि बर्णण होय भाब-युद्ध सने आनन्द-क्रन्दन उठे कृष्ण-प्रेम-मोय
अर्थ

श्रीवास के घर में यह कैसा भाव उठा? इसका वर्णन कौन कर सके? परस्पर विरोधी भावों का महासंग्राम छिड़ गया, और कृष्ण-प्रेम से भरा आनन्दमय रुदन प्रकट हो उठा।

चारि भाइ पडि' प्रभुर चरणे प्रेमे गदगद स्वरे कान्दिया कान्दिया काकुति कोरिया गडि' जाय प्रेम-भरे
अर्थ

चारों भाई प्रभु के चरणों में गिरकर भूमि पर लोटने लगे। प्रेम से भरकर, रोते-रोते, गद्गद स्वर में वे विनती करने लगे:

ओहे प्राणेश्वर ए हेनो बिपद प्रति-दिन जेनो होय जाहाते तोमार चरण-जुगले आसक्ति बाढिते रोय
अर्थ

"हे प्राणेश्वर! हम प्रार्थना करते हैं कि ऐसी विपत्ति हमें प्रतिदिन मिलती रहे, जिससे आपके चरण-युगल में हमारी आसक्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जाए।

बिपद-सम्पदे सेइ दिन भलो जे दिन तोमारे स्मरि तोमार स्मरण रोहित जे दिन से दिन बिपद हरि
अर्थ

"चाहे विपत्ति हो या सम्पत्ति, जिस दिन हम आपका स्मरण करते हैं, वही दिन शुभ है। हे कृष्ण! जिस दिन आपका स्मरण नहीं होता, वही दिन सचमुच विपत्ति का दिन है।

श्रीबास-गोष्ठिर चरणे पदिया भकतिबिनोद भणे तोमादेर गोरा कृपा बितरिया देखाओ दुर्गत जने
अर्थ

श्रीवास के परिवार के चरणों में गिरकर भक्तिविनोद कहते हैं: आप सब अपने गौर से कहकर उनकी कृपा-दृष्टि इस अभागे जीव पर भी डलवाइए।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
6