नदीया उदयगिरि पूर्णचन्द्र गौरहरि
कृपा करके पूर्णचन्द्र श्री गौरहरि नदिया रूपी उदयगिरि पर उदित हुए। पाप का अन्धकार नष्ट हो गया, तीनों लोक आनन्द से भर गए और सारा जगत हरि-ध्वनि से गूँज उठा।
उसी समय श्री अद्वैत प्रभु अपने घर में उठकर आनन्द-भरे मन से नाचने लगे। हरिदास ठाकुर को साथ लेकर वे हुङ्कार करते हुए कीर्तन करने लगे। वे क्यों नाच रहे थे, यह कोई नहीं जानता था।