नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
नाथ हरि जगन्नाथ हरि
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गाते समय
नाथ हरि जगन्नाथ हरि सीदति राधा'वास-गृहे
अर्थ
हे नाथ हरि, हे जगन्नाथ हरि, राधा अपने कुञ्ज-गृह में विकल हो रही है।
पश्यति दिशि दिशि रहसि भवन्तम्
तद्-अधर-मधुर-मधूनि पिबन्तम्
अर्थ
हर दिशा में, एकान्त में, वह तुम्हें देखती है, मानो तुम उसके अधरों का मीठा मधु पी रहे हो।
श्री-जयदेव-कवेर् इदम् उदितम्
रसिक-जनम् तनुताम् अतिमुदितम्
अर्थ
कवि श्री जयदेव द्वारा रचित यह गीत, इसके रस का आस्वादन करने वालों को महान आनन्द प्रदान करे।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- जयदेव गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- पद
- 3