Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

नाथ हरि जगन्नाथ हरि

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

नाथ हरि जगन्नाथ हरि सीदति राधा'वास-गृहे
अर्थ

हे नाथ हरि, हे जगन्नाथ हरि, राधा उस घर में विकल हो रही है जहाँ वह तुम्हारे लिए तरस रही है।

पश्यति दिशि दिशि रहसि भवन्तम् तद्-अधर-मधुर-मधूनि पिबन्तम्
अर्थ

हर दिशा में, एकान्त में, वह तुम्हें देखती है, मानो तुम उसके अधरों का मीठा मधु पी रहे हो।

श्री-जयदेव-कवेर् इदम् उदितम् रसिक-जनम् तनुताम् अतिमुदितम्
अर्थ

कवि श्री जयदेव द्वारा रचित यह गीत, इसके रस का आस्वादन करने वालों को महान आनन्द प्रदान करे।