Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दण्डवत् 34

प्रातर्-वन्याषनाकान्क्षिन् षृण्गाकारित-वत्सप असन्ख्य-वत्स-सन्चारिन् असन्ख्यार्भक-सण्गत
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, वन में पिकनिक की तरह नाश्ता करने की इच्छा से आपने भैंस के सींग का अपना बिगुल बजाकर ग्वाल-बालकों को बुलाया और असंख्य बछड़ों तथा बालकों के साथ (वन की ओर) चल पड़े।

षिक्य-चौर्यादि-विविध बाल-क्रीडाति-तोषित स्व-पाद-स्पर्षन-क्रीडा पटु-बालक-हर्षित
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, जब एक ग्वाल-बालक ने खेल-खेल में दूसरे की भोजन की पोटली चुरा ली, और जब चतुर ग्वाल-बालकों ने दूसरे खेल खेले, जैसे यह होड़ कि आपके चरण-कमलों को सबसे पहले कौन छू ले, तब आप अत्यन्त प्रसन्न और आनन्दित हो उठे।

वयस्याषक्य-सहन क्षण-मात्रा-विलोकन सुक-गीत-महा-भाग्य व्रज-बालक-वेष्टित
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आप सदा अपने हमउम्र मित्रों के साथ रहते थे, जो क्षण भर के लिए भी आपके अलौकिक पराक्रम को नहीं समझ पाते थे, और जिनके सौभाग्य की महिमा शुकदेव गोस्वामी ने गाई है।

इस भजन के बारे में

पद
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