दण्डवत् 25-26
प्रसिद बाल-गोपाल
सनातन गोस्वामी इस संग्रह के 121 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: कृष्ण-लीला-स्तव। 3 रिकॉर्डिंग सुनी जा सकती हैं।
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प्रसिद बाल-गोपाल
आनीत-कंस-सन्त्रास-प्रोषित-ज्ञाति-बान्धव
कंस-कारित-मञ्चौघ रङ्ग-भू-गमनोत्सुक
कंस-योषित्-समाश्वासिन् नादिष्ट-मृत-सत्क्रिय
काक-पक्ष-धर श्रीमद्-वसन्तित-निदाघ हे
गोपी-सौभाग्य-सम्भाव्यं गो-धूलि-च्छुरितालकम्
चक्षुः-साफल्य-सम्पादि-श्रीमद्-वक्त्राब्ज-वीक्षण
चाणूर-भाषितं वन्दे चाणूरोत्तर-दायकम्
जनितेन्द्र-रुषं शक्र-मद-वृष्टि-समोन्मुखम्
जय गोकुल-सन्त्रासि-केशि-विक्षेपण प्रभो
जय दानपति-ध्यात महा-महिम-सञ्चय
जय वत्सासुर-ध्वंसिन् कपित्थ-व्रात-पातन
ष्री - कृष्ण जीया मथुरावतीर्ण
आनीत-कंस-सन्त्रास
जय ष्री-मथुरा-नाथ
अद्य-ष्वो-गमन-व्याज
ष्री-जगन्नाथ नीलाद्रि
ष्रिमच्-चैतन्यदेव त्वां
नमो ब्राह्मण-रूपाय
पषाण-धातु-मृद्-दारु-- सिकता-मणि-लेख-ज
सर्व-षस्त्राब्धि-पीयुष
ष्री-कृष्ण तव कारुण्य
सूरसेन-महाराज
कंसासुर-बलोद्विग्न
भाद्र-कृष्णाष्टमी-जात
वसुदेव-स्तुतं साक्षाद्
पितृ-प्राग्-जन्म-कथक
कंस-घातित-दुर्गं त्वां
अद्दत्त-पूर्व-स्वपदाब्ज-सौहृद
वसुदेवोदितोपात
औत्थानिकोत्सवाम्बाभि
यषोदोत्सण्ग-पर्यण्कं
यषोदा-स्तन्य-मुदित
गर्ग-वाक्-चातुरी-हृष्ट
जयाण्गान-गण-प्रेक्ष्य
दधि-निर्मन्थनारम्भि
दृष्टार्जुन-तरु-द्वन्द्व
गोप-विस्मापन-क्रीड
परमात्मन् वासुदेव
उपनन्दाहित-प्रीते
व्रजानन्दाकर-क्रीड
जय वत्सासुर-ध्वंसिन्
प्रातर्-भोजन-संयुक्त
प्रातर्-वन्याषनाकान्क्षिन्
दुर्बुद्धि-सुप्त-पीनाही
पौगण्डाख्यात-कौमार
अदृष्य-तर्णकान्वेषिन्
गो-गोपी-स्तन्य-पाहन्त