Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दण्डवत् 49

स्व-बल्य्-अषन-कालिय दर्प-मर्दन-वाहन सौभर्य्-उक्ति-स्वकागम्य सर्पावस-ह्रदोद्धर
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आपके वाहन गरुड़ ने यह जानकर कि कालिय उनके अपने लिए रखी हुई भेंटें खा रहा है, उस सर्प का घमण्ड चूर कर दिया। सौभरि मुनि के वचनों के कारण गरुड़ यमुना के इस सरोवर के पास नहीं आ सकते थे, और इसी कारण कालिय ने उस सरोवर में शरण ली। हे प्रभु, उस सरोवर को विनाश से आपने ही बचाया।

दिव्य-स्रग्-गन्ध-वस्ताढय दिव्याभरण-भुषित महा-मणि-गणाकीर्ण व्रज-जीवन-दर्षन
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आप दिव्य और सुन्दर मालाओं, वस्त्रों, सुगन्धों, आभूषणों और बड़े-बड़े रत्नों से ऐश्वर्यपूर्वक सजे हैं। आपके दर्शन का अवसर ही व्रजभूमि के निवासियों का जीवन है।

स-हास-ष्री-बलाष्लिष्ट गोपालिण्गन-निर्वृत प्रसीद पित-दावाग्ने स्वजनार्ति-विनाषन
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, ग्वाल-बालकों और हँसते-मुस्कुराते भगवान बलराम के आलिंगन से आप आनन्दित हो गए हैं। आपने वन की आग को निगल लिया और इस तरह अपने भक्तों के कष्ट दूर कर दिए। हे प्रभु, मुझ पर कृपा कीजिए।

इस भजन के बारे में

पद
3