Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दण्डवत् 98

ईष-ज्णान-कृताष्लेष जननी-तट-भाव-वित् स्नेह-वर्धन-मिष्टोक्ति पितृ-मातृ-प्रमोद-कृत्
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, यह जानकर कि आप परम पुरुषोत्तम भगवान हैं, आपके पिता और माता (वसुदेव और देवकी) ने आपको गले लगाया। आप जानते थे कि वे आपसे कितना अधिक प्रेम करते हैं, और उस प्रेम को बढ़ाने के लिए आपने बहुत मधुर वचन बोलकर उन्हें आनन्दित किया।

प्रप्तालिन्गन-मुन्-मातृ तात-क्रोडाधिरोपित स्नेह-वाक्-पितृ-मात्र्-अष्रु धारा-स्नापित-मस्तक
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, जब आपने अपने माता-पिता को गले लगाया, तब वे आनन्द से भर उठे। स्नेह भरे वचन बोलते हुए उन्होंने आपके सिर को आँसुओं की बहती धारा से नहला दिया, जब आप उनकी गोद में आ बैठे थे।

परमानन्दित-ष्रीमद् देवक्य्-अनकदुन्दुभे जय प्रेम-सुखाच्छादि ज्णान दुःख-निवारक
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आपकी जय हो। आपने सौभाग्यशाली वसुदेव और देवकी को आनन्दित किया और उनके सारे दुःख दूर कर दिए। आपने उनके उस ज्ञान को ढक दिया कि आप परम...

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पद
3