Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

ओहे प्रभु दोयामोय तोमार चरण द्वोय

हरि हे ओहे प्रभु दोयामोय तोमार चरण-द्वोय श्रुति-शिरोपरि शोभा पाय गुरु-जन-शिरे पुन शोभा पाय शत गुण देखि आमार पराण जुडाय
अर्थ

हे हरि! हे दयामय प्रभु! आपके दोनों चरण वेदों के मस्तक पर शोभा पाते हैं। गुरुजनों के मस्तक पर वे सौ गुना अधिक शोभा पाते हैं। यह देखकर मेरे प्राण शीतल हो जाते हैं।

जीब मनोरथ-पथ तँहि सब अनुगत जीब-बञ्छ-कल्प-तरु जथा जीबेर से कुल धन अति-पूज्य सनातन जीबेर चरम गति तथा
अर्थ

जीव की समस्त कामनाओं का मार्ग उन्हीं चरणों के अनुगत है। वे ही जीवों के लिए कल्पवृक्ष के समान हैं। वे ही जीव का कुल-धन हैं, नित्य पूज्य हैं, और वे ही जीव की परम गति हैं।

कमलाख-पद-द्वोय परम आनन्द-मोय निखपट ए सेबिया सतत ए भक्तिबिनोद चाय सतत तुषिते ताय भक्त-जनेर हो'ये अनुगत
अर्थ

हे कमल-नयन प्रभु, आपके दोनों चरण परमानंदमय हैं। उन्हीं की निष्कपट सेवा करते हुए यह भक्तिविनोद सदा आपको प्रसन्न करना चाहता है, और आपके भक्तों का अनुगत बनकर रहना चाहता है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
3