Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

परम चैतन्य हरि ताँर शक्ति बनेश्वरी

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परम चैतन्य हरि ताँर शक्ति बनेश्वरी परा शक्ति बोलि' बेदे गाय शक्तिमाने सेबिबारे शक्ति काय-ब्यूह कोरे नाना शक्ति ताहे बहिराय
अर्थ

वेद कहते हैं कि भगवान कृष्ण परम चैतन्य हैं, और उनकी दिव्य शक्ति वृन्दावन वन की स्वामिनी है। शक्तियों के स्वामी की सेवा के लिए यह परा शक्ति अपने ही स्वरूप से अनेक अन्य शक्तियों को प्रकट करती है।

आधार-शक्तिते धाम अह्वय-शक्तिते नाम सन्धिनी-शक्तिते बस्तु जत सम्बित्-शक्तिते ज्ञान तटस्था जीब-बिधान ह्लादिनीते कोइलो सखी-ब्रत
अर्थ

आधार-शक्ति से धाम, आह्वय-शक्ति से नाम, और सन्धिनी शक्ति से सारी वस्तुएँ प्रकट होती हैं। संवित् शक्ति से ज्ञान और वे जीव प्रकट होते हैं, जो जड़ और चेतन की सीमा पर स्थित हैं। ह्लादिनी शक्ति से सखियाँ प्रकट होती हैं।

नित्य-सिद्ध सखी सब ह्लादिनीर सु-बैभब ह्लादिनी-स्वरूप मूल राधा चन्द्राबली आदि जत श्री-राधार अनुगत केहो नाहे राधा-प्रेमेरबाध
अर्थ

समस्त नित्य-सिद्ध सखियाँ ह्लादिनी शक्ति की ही महान विभूति हैं। ह्लादिनी शक्ति का मूल स्वरूप स्वयं श्री राधा हैं। चन्द्रावली और अन्य सभी गोपियाँ श्री राधा की ही अनुगामिनी हैं। कोई भी श्री राधा के कृष्ण-प्रेम में बाधा नहीं डाल सकता।

प्रेमेर बिचित्र गति प्रति-द्वन्द्वि हो'ये सति चन्द्र कोरे राधा-प्रेम पुष्ट सब सखीर एक-मन नाना-कये नाना-जन ब्रज-जुब-द्वन्द्वे कोरे तुष्ट
अर्थ

प्रेम की गति अत्यंत विचित्र है। यद्यपि चन्द्रावली प्रतिद्वंद्विनी प्रतीत होती हैं, तथापि वे राधा के कृष्ण-प्रेम को ही पुष्ट करती हैं। यद्यपि सभी गोपियाँ भिन्न-भिन्न शरीरों में भिन्न-भिन्न व्यक्ति हैं, तथापि वे सब एक चित्त होकर व्रज के युवा दिव्य युगल को संतुष्ट करती हैं।