Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पीरिति सच् चिद् आनन्दे रूपबती नारी

पीरिति सच्-चिद्-आनन्दे रूपबती नारी दोया-धर्म-आदि गुण अलङ्कार सब ताहारि
अर्थ

सत्-चित्-आनन्दमय भगवान के प्रति प्रेम एक सुन्दर नारी है, जो दया, धर्म आदि गुणों के आभूषणों से सुसज्जित है।

ज्ञान ता'र पट्ट-शाटी जोग-गन्ध-परिपाटि ए सबे शोभित सती कोरे कृष्ण-मन चुरि
अर्थ

ज्ञान उसका रेशमी वस्त्र है। योग उसका सुगन्धित इत्र है। यह सती अत्यन्त सुन्दर है और भगवान कृष्ण के हृदय को चुरा लेती है।

रूप बिना अलङ्कारे किबा शोभा ए सोंसारे पीरिति-बिहीन गुणे कृष्ण न तुषिते पारि
अर्थ

इस संसार में बिना सुन्दरता के आभूषण किसी को कैसे शोभा दे सकते हैं? इसी तरह, जिसके पास गुण तो हैं परन्तु प्रेम नहीं, वह भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न कर सकता है?

बानरीर अलङ्कार शोभा ना होय ता'र कृष्ण-प्रेम बिना तथा गुणे ना आदर कोरि
अर्थ

आभूषण किसी बन्दरिया को सुन्दर नहीं बना सकते। इसी प्रकार, जहाँ कृष्ण-प्रेम नहीं है, वहाँ मैं गुणों का कोई आदर नहीं करता।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतावली
पद
4