पीरिति सच् चिद् आनन्दे रूपबती नारी
सत्-चित्-आनन्दमय भगवान के प्रति प्रेम एक सुन्दर नारी है, जो दया, धर्म आदि गुणों के आभूषणों से सुसज्जित है।
ज्ञान उसका रेशमी वस्त्र है। योग उसका सुगन्धित इत्र है। यह सती अत्यन्त सुन्दर है और भगवान कृष्ण के हृदय को चुरा लेती है।
इस संसार में बिना सुन्दरता के आभूषण किसी को कैसे शोभा दे सकते हैं? इसी तरह, जिसके पास गुण तो हैं परन्तु प्रेम नहीं, वह भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न कर सकता है?
आभूषण किसी बन्दरिया को सुन्दर नहीं बना सकते। इसी प्रकार, जहाँ कृष्ण-प्रेम नहीं है, वहाँ मैं गुणों का कोई आदर नहीं करता।