Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधिका शरद-इन्दु-निन्दि मुख (राधिकाष्टकम्)

राधिका शरद-इन्दु-निन्दि मुख-मण्डली कुन्तले विचित्र-वेणी चम्प-पुष्प-शोभनी नील पट्ट अङ्गे शोभे ताहे आध ओटनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

श्रीमती राधिका का मुख शरद ऋतु के पूर्ण चन्द्रमा को भी लज्जित कर देता है। उनके सुन्दर ढंग से गुँथे केशों को फूलों के अनेक गुच्छे सजाते हैं। वे नीली साड़ी पहने हैं और उनके शरीर का ऊपरी भाग ओढ़नी से ढका है। मैं राजा वृषभानु की पुत्री श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

तरुण अरुण जिनि सिन्दूरेर मण्डली यैछे अलि मत्त भरे मलयज-गन्धिनी भुरूर भङ्गिम कोटी कोटी काम-गञ्जिनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

श्रीमती राधिका के माथे पर सिन्दूर की बिन्दी प्रातःकाल के सूर्य की लालिमा को भी जीत लेती है। उनके शरीर से आती कमल की सुगन्ध भौंरों को मतवाला कर देती है और वे उनके चारों ओर उड़ने लगते हैं। उनकी भौंहों की भंगिमा करोड़ों कामदेवों के गर्व को परास्त कर देती है। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधारानी के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

खञ्जन-गञ्जन-दिठि बङ्किम-सुचाहनी अञ्जन रञ्जित ताहे काम-शर-सन्धिनी तिल-पुष्प जिनि नासा वेसर-सुदोलनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

उनकी आँखें, जो खंजन पक्षी की तरह थिरकती हैं, काजल से सजी हैं। अपनी आँखों के कोने से वे अपनी सुन्दर चितवन ऐसे चलाती हैं, जैसे कामदेव के धनुष से फूलों के बाण छूटते हैं। उनकी सुन्दर नाक तिल के फूलों की शोभा को जीत लेती है और उसमें लटकती नथ बहुत सुन्दर झूलती है। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

पक्क बिम्ब-फल जिनि अधर सुरङ्गिनी दशन दाडिम्ब-बीज जिनि अति शोभनी वसन्त कोकिल जिनि सुमधुर-बोलनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

उनके होंठ पके बिम्बफल से भी अधिक लाल हैं और उनके दाँत अनार के दानों की तरह सुन्दरता से जमे हैं। उनकी वाणी कोयल की वाणी से भी अधिक मधुर है। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

कनक मुकुर जिनि गण्ड-युग शोभनी रतन मञ्जीर पाये बङ्क-राज-दोलनी केशर मुकुता-हार उर-पर झोलनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

उनके गाल सुनहरे वर्ण के साथ सुन्दरता से खिले हुए हैं। उनके पैरों में बँधे रत्नजटित घुँघरू खुलकर झूलते हैं। उनके लम्बे केश और मोतियों का हार उनके वक्षःस्थल पर पड़े हैं। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

कनक कलस जिनि कुच-युग शोभनी करिबर-कर जिनि बाहु-युग दोलनी सुललित अङ्गुलिते मुद्रिकार साजनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

उनके गालों की सुन्दरता सोने के दर्पण की सुन्दरता को जीत लेती है। वे रत्नजटित घुँघरू पहने हैं और उनके कान के कुण्डल सुन्दर ढंग से झूलते हैं। उनकी पतली उँगलियाँ रत्नजड़ित अँगूठियों से सजी हैं। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

गज-अरि जिनि माजा गुरुया नितम्बिनी ता'पर शोभित भाल कनकेर किङ्किनी कनक उलट रम्भा जानु-युग-शोभनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

वे गजराज से भी अधिक राजसी ठाठ से चलती हैं। उनकी पतली कमर पर सोने की करधनी सुन्दर चमकती है, और उसमें लगी छोटी-छोटी सोने की घण्टियाँ मधुर झंकार करती हैं। उनकी जाँघें सोने के केले के पेड़ के उलटे तने की तरह चिकनी और पतली हैं। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

हंस-राज-गति जिनि सुमन्थर-चलनी रातुल चरणे राजे कनया सुपञ्जिनी युगल चरणे शोभे यावक सुरञ्जिनी वन्दिये श्री-पाद-पद्म वृषभानु-नन्दिनी
अर्थ

उनकी चाल हंस की चाल से भी अधिक सुन्दर है। रत्नजटित घुँघरू उनके चरणों की शोभा बढ़ाते हैं। मैं राजा वृषभानु की पुत्री उन श्रीमती राधिका के चरण-कमलों की पूजा करता हूँ।

इस भजन के बारे में

पद
8