'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
श्रीमान अग्निदेव प्रभु की 26 रिकॉर्डिंग। ऑडियो इस्कॉन डिज़ायर ट्री के सौजन्य से चलता है।
26 भजन
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
उदिलो अरुण पूरब-भागे,
एइ-बारो करुणा कोरो वैष्णव गोसाइ
(प्रभु हे!)
कबे ह'बे बोलो से-दिन आमार्
कलि-कुक्कुर्-कदन् जदि चाओ (हे)
कृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
गाय् गोरा मधुर् स्वरे
गौराङ्गेर दुटि पद, जार् धन सम्पद,
जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन्
जे आनिलो प्रेम-धन कोरुणा प्रचुर्
नदीया-गोद्रुमे नित्यानन्द महाजन
नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं
नारद मुनि, बाजाय् वीणा
परम कोरुण, पहू दुइ जन
बोरो सुखेर् खबोर् गाइ
बोलो हरि बोलो (3 तिमेस्)
भज भकत-वत्सल श्री-गौरहरि
यदि ते हरि-पाद-सरोज-सुधा
राधा-कृष्ण प्राण मोर जुगल-किशोर
राधे जय जय माधव-दयिते
शुद्ध-भकत-चरण-रेणु,
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु जीवे दोया कोरि’
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु दोया कोरो मोरे
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
हरि हरि! बिफले जनम गोँआइनु