'राधा कृष्ण' बोल् बोल्
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
श्रीमान वैशेषिक प्रभु की 18 रिकॉर्डिंग। ऑडियो इस्कॉन डिज़ायर ट्री के सौजन्य से चलता है।
18 भजन
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
उज्ज्वल-वरण-गौर-वर-देहं
उदिलो अरुण पूरब-भागे,
कलि-कुक्कुर्-कदन् जदि चाओ (हे)
यद् अपि समाधिषु विधिर् अपि पश्यति
कृष्ण होइते चतुर्-मुख, होय् कृष्ण-सेवोन्मुख,
कृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
गाय् गोरा मधुर् स्वरे
चेतो-दर्पण-मार्जनं भव-महा-दावाग्नि-निर्वापणं
(किब) जय जय गोराचान्देर् आरतिको शोभा
दोयाल् निताइ चैतन्य बोले नाच रे आमार मन
नारद मुनि, बाजाय् वीणा
निताइ-पद-कमल, कोटि-चन्द्र-सुशीतल
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
भज रे भज रे आमार मन अति मन्द
भजहू रे मन श्री-नन्द-नन्दन
भाइ-रे!
शुद्ध-भकत-चरण-रेणु,