श्री राधा कृष्ण पद कमले मन
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1 रिकॉर्डिंगहे मेरे मन, श्री राधा-कृष्ण के चरण-कमलों में तुझे अंतिम शरण कैसे मिलेगी?
बहुत दिनों से यह दीन दास उन्हीं चरणों की आशा लगाकर बैठा है।
हे राधे! हे कृष्णचंद्र! हे भक्तों के प्राण! इस पापी को अपनी युगल-भक्ति का दान दीजिए।
'यह तो भक्तिहीन है', ऐसा कहकर मेरी उपेक्षा न कीजिए। इस मूर्ख को सही ज्ञान की शिक्षा दीजिए।
विषय-भोग की प्यास से पीड़ित इस दास को अपने युगल-विलास की सेवा का अधिकार दीजिए।
इस चंचल जीवन की धारा वेग से बहती हुई काल के सागर में जा मिलती है। जो दिन बीत गए, वे फिर लौटकर नहीं आएँगे। हे कृष्ण, अब क्या उपाय है?
आप पतितों के बंधु हैं, यह मैं जानता हूँ, हे मेरे नाथ। आप ही करुणा-जल के सागर हैं।
मैं अभागा हूँ, अत्यंत अज्ञानी हूँ, भक्ति का लेशमात्र भी मुझमें नहीं है। हे नाथ, अपने ही गुण से इस भव-क्लेश को दूर करके मुझे अपना बना लीजिए।
मुझे सिद्ध-देह देकर वृन्दावन में अपनी सेवा का अमृत दीजिए। मुझे प्रेम पिलाकर मतवाला बना दीजिए, और मेरे मुख से अपने ही गुणों का गान सुनिए।
श्रीरास-मंडल में युगल की सेवा में मुझे नियुक्त कीजिए। ललिता सखी की यह अयोग्य किंकरी, भक्तिविनोद, आपके चरण पकड़े हुए है।
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।