श्रीबास पण्डित बिग्रह गेहे
श्रीवास पण्डित के घर के मन्दिर-कक्ष में रत्नजटित सिंहासन पर बैठे भगवान श्री गौर बड़ी शोभा से विराजमान हैं।
उनका रूप कितना तेजस्वी है! वह सैकड़ों-सैकड़ों उगते हुए सूर्यों जैसा है।
उन्हें देखकर भगवान नित्यानन्द और भगवान अद्वैत आनन्द से भगवान गौर का अभिषेक करते हैं।
गंगाजल से भरे बहुत से कलश लाए जाते हैं। उन्हें कतार पर कतार रखा जाता है।
घड़ा भरकर प्रसन्न मन से भगवान अद्वैत भगवान गौरचन्द्र को स्नान कराते हैं।
गोविन्द दास का हृदय बहुत उदास है। उसने भगवान गौर का वह आनन्दमय अभिषेक नहीं देखा।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- गोविन्द दास
- पद
- 6