Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्रीबास पण्डित बिग्रह गेहे

श्रीबास पण्डित बिग्रह गेहे रत्न-सिंहासने श्री-गौर शोहे
अर्थ

श्रीवास पण्डित के घर के मन्दिर-कक्ष में रत्नजटित सिंहासन पर बैठे भगवान श्री गौर बड़ी शोभा से विराजमान हैं।

बपु स-ए ज्योति निकसये कत जनु उदय भेल भानु शत शत
अर्थ

उनका रूप कितना तेजस्वी है! वह सैकड़ों-सैकड़ों उगते हुए सूर्यों जैसा है।

त हेरिया सीतापति निता-इ करु अभिषेक आनन्दे अबगा-इ
अर्थ

उन्हें देखकर भगवान नित्यानन्द और भगवान अद्वैत आनन्द से भगवान गौर का अभिषेक करते हैं।

कलसि भरि सुरधुनी-बारि आनि बसा-ओल करि सारि सारि
अर्थ

गंगाजल से भरे बहुत से कलश लाए जाते हैं। उन्हें कतार पर कतार रखा जाता है।

झारि भरि अद्वैत मन आनन्दे स्नान करा-ओल श्री-गौरचन्दे
अर्थ

घड़ा भरकर प्रसन्न मन से भगवान अद्वैत भगवान गौरचन्द्र को स्नान कराते हैं।

गोबिन्द दास अति मति मन्द ना हेरल सो अभिषेक आनन्द
अर्थ

गोविन्द दास का हृदय बहुत उदास है। उसने भगवान गौर का वह आनन्दमय अभिषेक नहीं देखा।

इस भजन के बारे में

पद
6