Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

देखत बेकत गौरचन्द्र बेढल भकत नखत बृन्द

देखत बेकत गौरचन्द्र बेढल भकत-नखत-बृन्द अखिल भुबन उजोर-कारी कुन्द-कनक कान्तिया
अर्थ

भगवान गौर को देखो। वे भक्तों रूपी तारों से घिरे चन्द्रमा की तरह चमक रहे हैं, ऐसा चन्द्रमा जिसकी कान्ति चमेली के फूलों और सोने जैसी है, और जो सब लोकों को प्रकाश से भर देता है।

अगति पतित कुमुद-बन्धु हेरि उछल रसिक सिन्धु हृदय-कुहर-तिमिर-हारी उदित दिनहुं रातिया
अर्थ

भगवान गौर का चन्द्रमा उन कमल के फूलों का मित्र है, जो ऐसे पतित पापी हैं जिन्हें अच्छे भविष्य की आशा करने का साहस भी नहीं है। भगवान गौर का चन्द्रमा रसिक भक्तों के सागर में, जो दिव्य रसों का अमृत चखते हैं, ज्वार की ऊँची लहरें उठाता है। भगवान गौर का चन्द्रमा हृदय की गुफा में भरे अन्धकार को दूर करता है। भगवान गौर का चन्द्रमा दिन-रात चमकता है।

सहजे सुन्दर मधुर देह आनन्दे आनन्दे ना बन्धे थेह ढुलि ढुलि चलत खलत मत्त-करि-बर-भातिया
अर्थ

भगवान गौर का रूप स्वभाव से ही सुन्दर और मनमोहक है। आनन्द पर आनन्द से भरे होने के कारण वे शान्त नहीं रह पाते। भाव में विभोर होकर वे डगमगाते हुए चलते हैं, शोभा के साथ डगमगाते हैं, जैसे कोई मदमस्त हाथी।

लटन घटन भैगेल भोर मुकुन्द माधब गोबिन्द बोल रोम्3यत हसत धरणी खसित शोहत पुलक पान्तिया
अर्थ

भाव में विभोर होकर वे “मुकुन्द! माधव! गोविन्द!” पुकारते हैं। वे रोते हैं। वे हँसते हैं। वे भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनके शरीर के रोएँ खड़े हो जाते हैं। वे शोभायमान हैं।

महिमा महिमा को कहु ओर निज-पर धरि करये कोर प्रेम अमिया हरखि बरखि तरखित मही मातिया
अर्थ

उनकी महिमा महिमाओं में सर्वश्रेष्ठ है। उनकी महिमा का अन्त कहाँ है, यह कौन कहेगा? अपने हों या पराए, सभी को वे बाँहों में भरकर गले लगाते हैं। दिव्य प्रेम के अमृत की वर्षा बरसाकर वे इस प्यासे जगत् को आनन्द से मतवाला कर देते हैं।

यो रसे उत्तम अधम भाष बञ्चित एकलि गोबिन्द दास को जाने कि खणे कोन गढल काठ कठिन छातिया
अर्थ

उत्तम सन्त और अधम पापी, दोनों उस अमृत की बाढ़ में तैर रहे हैं। केवल गोविन्द दास वहाँ नहीं तैरता। केवल वही उस अमृत से ठगा गया है। गोविन्द दास उस अमृत से कब भीगेगा? कौन जाने? हाय! गोविन्द दास के कठोर हृदय की लकड़ी की छतरी उसे सदा सूखा रखती है।

इस भजन के बारे में

पद
6