गौर बरण तनु शोहन मोहन सुन्दर
उनका वर्ण गौर है। उनका रूप तेजस्वी, मनमोहक, सुन्दर, मधुर और शोभायमान है। उनके वस्त्र अनुपम उगते सूर्य को भी हरा देते हैं। उनका मुख सुन्दर और मनोहर है।
मैंने भगवान गौरांगचन्द्र को देखा। अब मैं भाव-विभोर हूँ। भगवान गौर नवद्वीप में उदित एक तेजस्वी चन्द्रमा हैं, ऐसा चन्द्रमा जो कलियुग के पापों के भयंकर अन्धकार को नष्ट कर देता है।
उनकी आँखें दिव्य प्रेम के भाव से चंचल हैं। वे सबको बार-बार जन्म और मृत्यु के बन्धन से मुक्त करते हैं। उनका सुन्दर रूप नित-नए दिव्य प्रेम से भरा हुआ है। वे भक्तों के बीच रहते हैं।
वे धीरे-धीरे मुस्कुराते हैं। वे मीठे शब्द बोलते हैं। उनकी धीमी चाल शोभा देती है। दीन पतित लोगों को दिव्य प्रेम का बीज देकर वे उनका उद्धार करते हैं। केवल गोविन्द दास का उन्होंने उद्धार नहीं किया। केवल गोविन्द दास ठगा गया।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- गोविन्द दास
- पद
- 4