नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
श्रील नरोत्तम दास ठाकुर प्रणाम
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अक्षर
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गाते समय
श्री-कृष्ण-नामामृत-वर्षि-वक्त्र
चन्द्र-प्रभा-ध्वस्त-तमो-भराय
गौराङ्ग-देवानुचराय तस्मै
नमो नमः श्रील-नरोत्तमाय
अर्थ
मैं श्रील नरोत्तम को बार-बार प्रणाम करता हूँ, जो श्री गौरांगदेव के अनुचर हैं। उनके चन्द्रमा जैसे मुख से श्री कृष्ण के नाम का अमृत बरसता है, और उसकी चाँदनी ने घने अँधेरे को मिटा दिया है।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- प्रणाम मन्त्र
- भाव
- पद
- 1