कृष्ण प्रसादेन समस्त
कृष्ण-प्रसादेन समस्त-शैल
विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर इस संग्रह के 13 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: स्तवामृत-लहरी, वैष्णव आचार्यों के भजन। 14 रिकॉर्डिंग सुनी जा सकती हैं।
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कृष्ण-प्रसादेन समस्त-शैल
संसार-दावानल-लीढ-लोक
गाङ्गेय-चाम्पेय-तडिद्-विनिन्दि
न योग-सिद्धिर् न ममास्तु मोक्षो
किं तपश् चचार तीर्थ-लक्षम् अक्षयं पुरा
मधुर-मृदुल-चित्तः प्रेम-मात्रैक-वित्तः
जाम्बूनदोष्णीष-विराजि-मुक्ता-
साक्षान् महत्तम-महाघन-चिद्-विलास-
स्वरूप भवतो भवत्व् अयम् इति स्मित-स्निग्धया
छत्रं शक्ति-यवाङ्कुशं पवि-चतुर्-जम्बू-फलं कुण्डलम्
गदाधर यदा परः स किल कश्चनालोकितो
श्री गौराङ्ग-महाप्रभोश्-चरणयोर् या केश-शेषादिभिः
स्व-दयित-गिरि-कच्छे गव्य-दानार्थम् उच्चैः