Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तोमार गम्भीर मन नाहि बुझे अन्य जन

हरि हे तोमार गम्भीर मन नाहि बुझे अन्य जन सेइ मन अनुसारि सब जगत-उद्भाब-स्थिति प्रलय-सोंसार-गति मुक्ति आदि शक्तिर बैभब
अर्थ

हे कृष्ण! आपके गहरे मन को कोई नहीं जानता, फिर भी सब आपके मन की इच्छा के अनुसार ही चलते हैं। जगत की उत्पत्ति, पालन और प्रलय, जन्म-मृत्यु के संसार की सारी गतियाँ, और मुक्ति आदि, सब कुछ आपकी ही शक्ति और वैभव से प्रकट होता है।

ए सब बैदिक लीला इच्छा-मात्र प्रोकाशिला जीबेर बासना अनुसारे तोमाते बिमुख हो'ये माजिल अबिद्या लो'ये सेइ जीब कर्म-पाराबारे
अर्थ

कुछ जीवों की इच्छा के अनुसार आप केवल अपनी इच्छा मात्र से यह भौतिक जगत रच देते हैं। कुछ मोहित जीव आपसे मुख मोड़कर अज्ञान में पड़ जाते हैं और कर्म के सागर में डूब जाते हैं। वेद इन सब लीलाओं का वर्णन करते हैं।

पुनः जदि भक्ति कोरि' भजे भक्त-सङ्ग धोरि' तबे पाय तोमार चरण अन्तरङ्ग-लीला-रसे भसे माया ना परशे भक्तिबिनोदेर फिरे मन
अर्थ

परन्तु यदि कोई भटका हुआ जीव आपके भक्तों की संगति में रहकर भक्ति करे और आपकी आराधना करे, तो वह आपके चरण-कमल प्राप्त कर लेता है। वह आपकी अन्तरंग लीलाओं के रस में तैरने लगता है, और माया उसे फिर स्पर्श नहीं कर पाती। भक्तिविनोद ने निश्चय किया है कि वह अपना हृदय इस प्रकार आपकी ओर मोड़ेगा।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
3