यदि गौर ना होइतो
यदि भगवान गौर इस कलियुग में युगावतार के रूप में प्रकट न हुए होते, तो हमारा क्या होता? हम जीना कैसे सह पाते? इस ब्रह्माण्ड में श्री राधा की महिमा बनाने वाले प्रेम-रसों की सर्वोच्च सीमा के बारे में कौन जान पाता?
किसमें इतनी शक्ति होती कि वह उस आनन्दमयी भक्तिमय सेवा को कर पाता, जो व्रज की युवतियों के चरण-चिह्नों पर चलती है? सच तो यह है कि वृन्दा देवी के परम मधुर वन में प्रवेश करने के लिए व्रज की गोपियों की चतुर निपुणता पहली शर्त है।
अहो, कृपया भगवान गौरांग के महिमामय गुणों का बार-बार गान कीजिए! बस अपने हृदय को सरल बनाए रखने का प्रयत्न कीजिए। अविद्या के इस सागर में एक भी व्यक्ति ने कभी उनके जैसा उदार व्यक्तित्व नहीं देखा।
यद्यपि मैं भगवान गौरांग के पवित्र नाम का जप करता हूँ, फिर भी किसी तरह मैं आनन्द में पिघला नहीं। तब मैंने इस शरीर का बोझ कैसे उठाए रखा है? सृष्टिकर्ता ने इस शरीर को वासु घोष के हृदय की जगह पत्थर देकर कैसे गढ़ दिया है?
इस भजन के बारे में
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- वासुदेव घोष · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।