आजु शुभ क्षणे पोहा इल निशि
रात बीत गई है। अब शुभ क्षण है। नदिया के लोग आनन्द में मग्न हैं।
प्रेम से भरे हुए सब लोग बालक गौरचन्द्र को देखने के लिए दौड़कर शची के घर आते हैं।
आँगन में गौर शोभायमान और तेजस्वी हैं। वे संसार के लोगों की आँखें और मन चुरा लेते हैं।
उनके साथी चारों ओर से उन्हें घेरे हुए हैं, और वे तारों के समूह से घिरे चन्द्रमा की तरह चमकते हैं।
उनके सिवा और किसी का स्मरण किसे रहता है? सब लोग अपनी आँखों से उनके मुख के दर्शन को पीते हैं।
हर व्यक्ति भगवान गौर के साथ अपने-अपने सम्बन्ध का रस चखता हुआ आनन्दित है। क्या कभी नरहरि भी उनका मुख देख पाएँगे?
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरहरि दास
- पद
- 6