अद्वैत घरणी सीता ठाकुराणी केबल रसेर राशि
अद्वैत आचार्य की पत्नी सीता ठाकुरानी, जो दिव्य प्रेम के रस से सराबोर हैं, बिना पलक झपकाए बालक गौर के सुन्दर मुस्कुराते मुख को निहारती हैं।
बार-बार उनकी नवीन महिमा के चिन्तन में लीन होकर वे शान्त नहीं रह पातीं। उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बहती है।
उनके हृदय में प्रेम भरी कितनी ही बातें जन्म लेती हैं? उनका मन स्नेह से व्याकुल है। शची से बोलते हुए वे अपने भाव प्रकट करने का यत्न करती हैं।
वे हर प्रकार का आशीर्वाद देती हैं। वे प्रशंसा के वचन कहती हैं। उनके सुख के सागर का कोई किनारा नहीं है। नरहरि कहते हैं: उनके हृदय में जो कुछ है, उस सबको समझने की शक्ति किसमें है?
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरहरि दास
- पद
- 4