Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आहा मरि मरि गौराङ्गचान्देर चरिते केब न झुरे

आहा मरि मरि गौराङ्गचान्देर चरिते केब न झुरे नदीया-निबासी निशि अदरशे पराण धरिते नारे
अर्थ

हाय! हाय! हाय! बालक गौरांगचन्द्र की लीलाओं के कारण कौन नहीं रोता? रात में बालक गौरचन्द्र को न देख पाने के कारण नदिया के लोग अपने प्राण धारण नहीं कर पाते।

शुतिया स्वपने आन नाहि जाने मन सरबस गोरा रजनी-प्रभाते गोरा गोरा बलि जागिया से रसे भोरा
अर्थ

सोने के लिए बिछौने पर लेटकर वे बालक गौरांगचन्द्र के सिवा और कुछ नहीं सोच पाते। उनके हृदय बालक गौरांगचन्द्र के चिन्तन में लीन रहते हैं। भोर होते ही वे उठकर “गौर! गौर!” कहते हैं। बालक गौर के प्रेम-रस में वे विभोर हैं।

बृद्ध बृद्ध यत पुरुष प्रकृति उपमा नाहिक कारु कत न यतने केबा सिरजिल स्वभाब चरित चारु
अर्थ

स्त्री और पुरुष बालक गौर का वर्णन करने के लिए कोई उपमा नहीं सोच पाते। उन्होंने कितनी बार यत्न किया? किसी को भी ऐसी कोई वस्तु नहीं सूझी जो बालक गौर की सुन्दर महिमा के समान हो।

नरहरि पहुं निछनि से सब बृद्ध परिजन पाशे गोरा स्नेह-भरे गर गर किछु कहे सु-मधुर भाषे
अर्थ

अपने साथियों को पास लेकर नदिया के सब वयस्क लोग उस बालक की पूजा करते हैं जो नरहरि के स्वामी हैं। वे बालक गौर से प्रेम भरे मधुर वचन बोलते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4