Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आजु कि आनन्द श्री शची भुबने रजनी प्रभात काले

आजु कि आनन्द श्री-शची-भुबने रजनी-प्रभात-काले प्रिय-परिकर माझे बिश्वम्भर बिलसे भङ्गिमा भाले
अर्थ

भोर के समय शची के घर में आनन्द भरा है। अपने साथियों के बीच बालक विश्वम्भर मनोहर ढंग से खेल रहे हैं।

यार ये-इ भाब से-भाबे बःअबित सबारे करये सुखी भुबन-मोहन गुण-मणि हेन सु-घड कभु ना देखि
अर्थ

वे सबको सुख देते हैं। सब उन्हीं के चिन्तन में लीन हैं। वे गुणों के रत्न के समान हैं। वे सब लोकों को मोह लेते हैं। उनके जैसा कोई और किसी ने नहीं देखा।

बृद्ध बृद्ध-नारी यत अतिशय आतुर स्नेहेर भरे ओ मुख-चन्द्रमा हेरि हेरि केह धैरज धरिते नारे
अर्थ

वयस्क स्त्री-पुरुष सब उनके प्रेम से भरे हैं। उनके चन्द्रमा जैसे मुख को बार-बार देखकर कोई भी शान्त नहीं रह पाता।

नयनेते बारि बहे अनिबार मरम आनन्द-मने नरहरि प्राण गौराङ्ग-चरित पुनः परस्पर भणे
अर्थ

उनकी आँखों से निरन्तर आँसू बहते रहते हैं। उनके हृदय आनन्द से भरे हैं। वे बार-बार एक-दूसरे से बालक गौरांग की लीलाएँ कहते हैं, वही गौरांग जो नरहरि के प्राण हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4