Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आजि आङ्गिन पर नदीया बालक साञे

आजि आङ्गिन पर नदीया बालक साञे रङ्गे खेलत शची-बाला नखत-निकर माझे एक-शशी राजे करत दिक उजल
अर्थ

शची के नन्हे पुत्र आज आँगन में नदिया के बालकों के साथ आनन्द से खेल रहे हैं। उनके हाथों और पैरों के नाखून मानो एक ही राजसी चन्द्रमा हैं, जो सब दिशाओं को प्रकाश से भर रहा है।

बिबिध खेलन ले-इ सकल मिलि खेलत बिबिध खेला सबहु बनदे हस बिकशित जनु एक साञे बहु पदमक मेला
अर्थ

सब बालक इकट्ठे होकर तरह-तरह के खेल खेलते हैं, तरह-तरह के खेल खेलते हैं। हर मुख पर हँसी खिल उठी है। बालक गौर और दूसरे बालक ऐसे लगते हैं मानो एक कमल का फूल बहुत से कमल के फूलों के साथ खेल रहा हो।

सो खेला दरशने गर गर अन्तर आनन्दे शची उतरोल दण्डे शत-बेरि चुमे बदन-चान्द बिश्वम्भर करि कोल
अर्थ

बालकों का खेल देखकर शची का हृदय आनन्द से भर जाता है। नन्हे विश्वम्भर को गोद में बिठाकर वे उनके मुख को सौ-सौ बार चूमती हैं।

बसन-अञ्चले श्रम-जल मुछि श्री-अङ्गे करत बातास करे चामर ले-इ पासे ठारि रहु पामर नरहरि दास
अर्थ

वे अपने वस्त्र के छोर से उनके पसीने की बूँदें पोंछती हैं और उनके सुन्दर अंगों पर पंखा झलती हैं। पास में खड़ा पापी नरहरि दास हाथ में चामर लेकर उसे डुला रहा है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4