Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आजु कत ना आनन्द मने

आजु कत ना आनन्द मने बसिया आसने, बिश्वम्भर बेश, रचये बयस्य गणे
अर्थ

आज भगवान् विश्वम्भर को सिंहासन पर बिठाकर उनके मित्र उन्हें सुन्दर वस्त्रों और आभूषणों से सजाते हैं। उन मित्रों के हृदयों में न जाने कितने आनन्द भरे हैं?

गन्ध चन्दन चरचे गाय बिरचये चारु ललाट तिलक, केब ना भुलय ताय
अर्थ

वे उनके अंगों पर सुगन्ध और चन्दन का लेप करते हैं। उनके सुन्दर माथे पर तिलक लगाते हैं। उनमें से कौन अभिभूत नहीं हो जाता?

बान्धि चञ्चर चिकुर भाले मनेर उल्लासे मधुर छान्दे, बेडाये मालती माले
अर्थ

वे उनके सुन्दर घुँघराले केश बाँधते हैं। प्रसन्न हृदय से वे उन पर मधुर मालती की माला डालते हैं।

काणे कुण्डल अर्पण करे झलकये गण्ड-तटे गण्ड-युग दर्पण दरप हरे
अर्थ

वे उनके कानों में कुण्डल पहनाते हैं। वे कुण्डल उन गालों पर चमकते हैं, जो चमकते दर्पणों का भी गर्व हर लेते हैं।

गले दे-इ मणिमय हार परिसर बुके दोले सु-ललित के दिबे उपमा तार
अर्थ

वे उनके गले में रत्नों का हार पहनाते हैं। वह हार उनके वक्ष पर सुन्दर ढंग से इधर-उधर झूलता है। उपमाओं और रूपकों से उसका वर्णन कौन कर सकता है?

बाहु अङ्गद बलय करे अङ्गुले अङ्गुरि सोंपि मुख-पाने, चाहिल धैरज धरे
अर्थ

वे उनकी कलाइयों और भुजाओं पर कंगन और बाजूबन्द पहनाते हैं। कोई उनकी उँगलियों में अँगूठियाँ पहनाता है। वे शान्ति से उनका मुख निहारते हैं।

सिंह जिनि माजा-खानि क्षीण सोँआर शिकलि साजा-इते आङ्खि ह-इल निमिष-हीन
अर्थ

वे उनकी पतली कमर पर सोने की कड़ियों वाली करधनी पहनाते हैं। उनकी वह कमर सिंह की सुन्दर कमर को भी जीत लेती है। वे बिना पलक झपकाए उन्हें निहारते हैं।

बेश-बिन्यास भुबन लोभा रक्त-प्रान्त बास परा-इया नरहरि निखरये शोभा
अर्थ

वे उन्हें लाल किनारी वाला वस्त्र पहनाते हैं। उनके वेश और आभूषणों की शोभा देखने के लिए सारा संसार लालायित है। नरहरि उनकी मनोहर शोभा को निहारता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
8