Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आमि सेइ दुष्ट मति ना देखिया अन्य गति

हरि हे आमि सेइ दुष्ट-मति ना देखिया अन्य-गति तब पदे लो'येछि शरण जानिलम आमि नाथ तुमि प्रभु जगन्नाथ आमि तब नित्य परिजन
अर्थ

हे कृष्ण! कोई और आश्रय न देखकर, मैं, यह दुष्ट-हृदय व्यक्ति, अब आपके चरणों की शरण ले चुका हूँ। हे प्रभु, अब मैं जान गया हूँ कि आप ही समस्त लोकों के स्वामी हैं, और मैं आपका नित्य सेवक हूँ।

सेइ दिन कबे ह'बे ऐकन्तिक-भाबे जबे नित्य-दास-भाब लो'ये आमि मनोरथान्तर जत निह्शेष कोरिया स्वतः सेबिबो आमार नित्य-स्वामी
अर्थ

वह दिन कब आएगा, जब मैं निष्काम भाव से आपका नित्य दास बनूँगा? कब मैं अपनी सारी दूसरी इच्छाएँ पूरी तरह छोड़कर आपकी, अपने नित्य स्वामी की, सेवा करूँगा?

निरन्तर सेबा-मति बहिबे चित्तेते सती प्रशान्त होइबे आत्मा मोर ए भक्तिबिनोद बोले कृष्ण-सेबा-कुतूहोले चिरो-दिन थाकि जेन भोर
अर्थ

मेरा शान्त और पवित्र हृदय सदा आपकी सेवा की भावना से भर जाए, ऐसा कब होगा? भक्तिविनोद कहते हैं, कृष्ण की सेवा के आनन्द में मैं सदा डूबा रहूँ।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
3