Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तबाङ्घ्रि कमल द्वोय बिलास बिक्रम मोय

हरि हे तबाङ्घ्रि-कमल-द्वोय बिलास-बिक्रम-मोय पराबर जगत ब्यापिया सर्ब-खण बर्तमान भक्त-क्लेश-अबसान लगि' सदा प्रस्तुत होइया
अर्थ

हे कृष्ण! आप अपने दोनों लीलामय चरण-कमलों से ऊँचे-नीचे सभी लोकों में सर्वत्र विचरण करते हैं। हर क्षण आप अपने भक्तों के दुःख मिटाने के लिए तैयार रहते हैं, इसीलिए सदा आपकी महिमा गाई जाती है।

जगतेर सेइ धन आमि जग-मध्य-जन अत एब सम अधिकार आमि किबा भाग्य-हीन साधने बञ्चित दीन कि काज जीबने आर छार
अर्थ

यह महान सम्पत्ति इस संसार में विद्यमान है, और मैं भी इस संसार का ही एक जीव हूँ, इसलिए उस पर मेरा भी वही अधिकार है। फिर मैं इतना दुर्भाग्यशाली क्यों हूँ? मैंने स्वयं को क्यों छला और दीन बना लिया? मैंने अपने जीवन को व्यर्थ राख के समान क्यों कर दिया?

कृपा बिना नाहि गति ए भक्तिबिनोद अति दैन्य कोरि' बोले प्रभु पाय कबे तब कृपा पे'ये उठिबो सबले धे'ये हेरिबो से पद-जुग हाय
अर्थ

आपकी कृपा के बिना कोई शुभ भविष्य नहीं है। प्रभु के चरणों के निकट जाकर, अत्यन्त दीनता से भक्तिविनोद कहते हैं, हे प्रभु, मुझे आपकी कृपा कब मिलेगी? मैं कब उठकर पूरे बल से आपकी ओर दौड़ूँगा? मैं आपके दोनों चरण कब देख पाऊँगा?

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
3