Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बिभाबित रति जबे क्रियापर हो'ये तबे

बिभाबित रति जबे क्रियापर हो'ये तबे अनुभाब होय तो' उदित चित्त-भाब उद्घाटिया कोरे बाह्य सु-बिक्रिया जखन जे होय तो' उचित
अर्थ

विभाव से जगी रति जब क्रिया में आती है, तब अनुभाव (बाद में उठने वाले भाव-लक्षण) प्रकट होता है। तब हृदय का प्रेम बाहर अनेक लक्षणों के रूप में दिखने लगता है।

नृत्य गीत बिलुण्ठन क्रोशन तनु-मोटन हुङ्कार जृम्भन घन-श्वास लोकनापेखित मति लाल-स्रब घूर्ण अति हिक्कदोया अट्ट अट्ट हास
अर्थ

ये लक्षण हैं: नाचना, ऊँचे स्वर से गाना, भूमि पर लोटना, शरीर को तानना, ज़ोर से पुकारना, जम्हाई लेना, तेज़ साँस लेना, दूसरे लोगों की उपस्थिति की परवाह न करना, लार बहना, बहुत ज़ोर से हँसना, सिर घुमाना, और डकार लेना।

गात्र चित्त जत सब अलङ्कार सु-बिभाब निगदित बिंशति प्रकार उद्भास्वर नाम तार धम्मिल्ल्या संस्रण आर फुल्ल घ्राण नीब्यादि बिकार
अर्थ

शरीर और मन के बीस अलंकार भी होते हैं, जो भाव के आभूषण हैं। इनमें से उद्भास्वर नामक लक्षणों में केश-बन्ध खोलना, फूलों को सूँघना, और कटिबन्ध खोलना सम्मिलित हैं।

बिलापालाप सम्लाप प्रलाप ओ अनुलाप अपलाप सन्देशातिदेश अपदेश उपदेश निर्देश ओ ब्यपदेश बाचिकानुभाबेर बिशेष
अर्थ

विलाप, आलाप, संलाप, प्रलाप, अनुलाप, अपलाप, सन्देश, अतिदेश, अपदेश, उपदेश, निर्देश और व्यपदेश, ये सब वाणी में प्रकट होने वाले अनुभाव के लक्षण हैं।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
4